Shahid Naqvi

Freelance Senior Journalist

135 Posts

211 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 17405 postid : 1283516

राम की अयोध्या फिर सुर्खियों में

Posted On: 20 Oct, 2016 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश मे अचानक राजनीतिक परिदृश्य कुछ बदलता दिख रहा है।आगामी विधानसभा चुनाव के लिये मैदान में उतरने के लिये अब तक शिद्दत से मुख्यमंत्री का चेहरा तलाश रही भाजपा ने लगता है अब अपना इरादा बदल दिया है।वह किसी नेता का चेहरा सामने लाये बिना चुनाव लड़ेगी यानी अब भाजपा भगवान राम के चेहरे का सहारा ले कर चुनावी वैतरणी पार करने की सोच रही है।अयोध्या में रामायण म्यूजियम बनाने का केंद्र सरकार के ऐलान को राजनीतिक हलके मे इसी नजरिये से लिया जा रहा है।इसी बीच मोदी सरकार के ऐलान के उलट अखिलेश सरकार ने भी इंटरनेशनल रामलीला थीम पार्क को मंजूरी दे दी।साफ है तीन दशकों के इतिहास के तहत चुनावी मौसम मे अयोध्या एक बार फिर सुर्खिंयों में हैं।राम के नाम पर चुनावी नैया पार लगाने की कोशिशें एक बार फिर तेज हो गई हैं।केंद्र सरकार जहां रामायण सर्किट के लिए खजाना खोल रही है, वहीं अखिलेश सरकार भी राम के नाम पर भाजपा को वॉकओवर देने को तैयार नहीं है।दशहरे के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब लखनऊ में जय श्रीराम का जयघोष किया था तभी साफ हो गया कि आने वाले वक्त में यूपी चुनाव के भंवर को पार करने के लिए सियासत और सियासी दल भगवान राम के कंधे पर जरूर सवार होगें।अब देखिये इसके बाद राजनीति में राम की नैया में बैठने की होड़ शुरू हो गई है।वैसे देखा जाये तो इस बार सबसे पहले कांग्रेस ने मंदिर और दरगाह के जरिये सुर्खियां बटोरने का सिलसिला शुरू किया है।हाल मे ही देवरिया से दिल्ली तक की किसान यात्रा के दौरान राहुल गांधी रास्ते की हर मंदिर और दरगाह में अपना मत्था टेकते रहे हैं। वो अयोध्या में हनुमान गढ़ी मंदिर गए तो दरगाह भी गये, विंध्याचल मंदिर के बाद चित्रकूट में कामदगिरि के मंदिर भी गये जहां कभी भगवान राम ने 11 साल बनवास काटे थे। चित्रकूट के कामदगिरि मंदिर में तो राहुल गांधी ने विधिवत पूजा अर्चना भी की थी।मंदिर के विजिटिंग रजिस्टर में अपने भाव भी व्यक्त किये और लिखा कि मैं सौभाग्यशाली हूं कि उस जगह आया जहां भगवान राम रहे थे। माथे पर चन्दन, कांधे पर देवी की चुनरी और गले में रुद्राक्ष और स्फटिक की माला पूरी, किसान यात्रा में राहुल गांधी का ये नया चेहरा देखा गया।कांग्रेस 27 साल से यूपी में बनवास झेल रही जिसकी वापसी के लिये राहुल ने ये सारी कवायद की है।कहा जाता है कि शायद ही कभी गांधी परिवार के किसी शख्स ने सत्ता के लिये इतने मंदिर और दरगाहों में मत्थाा टेका होगा।वहीं राजनीति के जानकार कहते हैं कि पिछले लोकसभा के चुनाव में मिली करारी हार के बाद मंथन में ये निकल के आया था कि कांग्रेस पार्टी की हार की बड़ी वजह पार्टी की एक ख़ास वर्ग के लिये चेहरा बन जाने की छवि रही है।लिहाजा 27 साल बाद यूपी में वापसी के लिये कांग्रेस हर दरवाजा खटखटा रही है और हिंदुओं को अपनी तरफ मोड़ने की रणनीति पर भी चल रही है।

शायद इसी लिये एक तरफ अखिलेश ने अयोध्या में रामायण पर आधारित थीम पार्क बनाने का ऐलान किया तो केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने अयोध्या में रामायण म्यूजियम की नींव रखने का ऐलान कर दिया है।इन दो ऐलानों और कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व के रूख को देख कर कहा जा सकता है कि यूपी मे के नाम पर राजनीति की पारा अभी और चढ़ने वाला है।मोदी सरकार के ऐलान के तत्कालबाद केन्द्रीय पर्यटन एवं सांस्कृतिक मंत्री महेश शर्मा अयोध्या पहुंच गये।हालांकि महेश शर्मा का कहना है कि सरकार के इस फैसले को चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।अयोध्या और पूरे देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयास का हिस्सा है।यह दौरा सरकार के विकास के एजेंडे का हिस्सा है।श्रीराम पर छिड़ी इस महाभाररत में अखिलेश ने जो दांव चला, उस पर बीजेपी सीधे हमला नहीं कर सकती। इसलिए वो अखिलेश पर वार तो कर रही है, लेकिन बहुत संभल-संभल कर।जरा बयान पर गौर करें कि, बीजेपी ने कहा कि यूपी कैबिनेट का ये फैसला अच्छा है पर नीयत अच्छी नहीं है।टाटा बाय करने का वक्त आया तो यूपी की सपा सरकार को अयोध्या याद आया है।राम और अयोध्या भाजपा के लिए पुराना चुनावी मुद्दा रहा है।बाकी पार्टियां बीजेपी पर इस बात को लेकर हमला करती थीं।अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ऐसा दांव चला है कि भाजपा सीधे उसका विरोध नहीं कर पा रही है।लेकिन इतना तय है कि आने वाले वक्त में यूपी में राम पर राजनीति तेज होने वाली है।सूबे की सियासत में अयोध्या अहम भूमिका निभाती रही है। राम के नाम पर सरकार बनती, बिगड़ती रही हैं।अब भगवान राम की नगरी के सौन्दर्यीकरण और योजनाओं के जरिये संदेश देने की कोशिश की जा रही है। इसमें केंद्र और प्रदेश, दोनों ही सरकारें पीछे नहीं है।गौरतलब है कि भाजपा ने अब तक सबसे ज़्यादा जयश्रीराम के नाम और अयोध्या को भुनाया है।
इतिहास बताता है कि पिछले करीब दर्जन भर चुनावों में बीजेपी राम को याद कर चुकी हैं।यहां तक जब राम से काम नहीं चलता तो हिंदुत्व के कुछ और मुद्दे सामने आ जाते हैं।उदाहाण के तौर पर 2002 के यूपी विधानसभा चुनाव के पहले अयोध्या में विश्व हिन्दू परिषद का शिला पूजन अभियान चलाया गया।साल 2004 मे लोकसभा से पहले अयोध्या चलो अभियान चला तो 2007 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों से पहले भाजने श्रीराम प्रतिमा पूजन अभियान चलाया थ्रा।याद करिये जब 2012 मे यूपी मे नई सरकार चुनी जानी थी तो चुनाव से पहले अयोध्या में राष्ट्रीय संत सम्मेलन का आयोजन किया गया।जब 2014 मे लोकसभा के आम चुनावों का ऐलान हुआ तो भाजपा से जुड़ें संघटन विश्व हिंदू परिषद ने मोर्चा सम्भाला और अयोध्या में 84 कोसी परिक्रमा का कार्यक्रम रख्र दिया।यही नही इसके बाद भी जब भी देश मे कहीं भी चुनाव हुये और मतों के धुर्वीकरण की जरा भी सम्भावना रही तो विकस के बजाय दूसरे मुद्दे सब पर भारी रहे।मिसाल के तौर पर सितंबर 2014 के उत्तर प्रदेश उप चुनाव से पहले लव जेहाद और घरवापसी के मुद्दे राजनीतिक फलक पर गूंजते रहे।फिर बिहार विधान सभा चुनाव आया तो गौ हत्या सुर्खियों में रही जिसके जवाब मे पुरस्कार वापसी का लम्बा सिलसिला चला।असम मे भी चुनावों के दौरान अलग मुद्दे उठते रहे।अब सूबे की जनता को नये साल मे अपनी नई सरकार चुननी है तो जाहिर है कि अखिलेश सरकार के साथ्-साथ मोदी सरकार के पौने तीन साल के कामकाज की असली परख होगी तो फिर से विकास के साथ रामजी याद आ गयें हैं।पिछली करीब आठ मिसालों को देख कर ये कहने मे कोई हर्ज नही कि यह सब केवल संयोग तो कतई नहीं हो सकता है।वैसे केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा अयोध्या मे राम रामायण संग्रहालय के लिये जमीन तलाशते वक्त बार बार यही दोहराते रहे कि वह राजनीति करने अयोध्या नहीं आये हैं।संतों से आशीर्वाद प्राप्त करने और भगवान राम की सेवा करने के लिये आये हैं।वह ये भी जोड़ते गये कि बहुत से लोगों को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के लिये काम करने का मौका नहीं मिला लेकिन हमारी सरकार को भगवान राम के प्रति काम करने का मौका मिला है जिसके तहत मैं अयोध्या आया हूँ।
बताया जाता है कि अयोध्या में मॉर्डन टेक्नालॉजी से रामायण संग्रहालय का निर्माण शीघ्र होगा।26 या 28 एकड़ की जमीन पर बनने वाला रामायण संग्रहालय भव्य होगा जिसकी लागत लगभग 151 करोड़ रुपये आयेगी। अंतर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के पीछे और अयोध्या बाईपास के पास मे से किसी एक जगह पर ये बनेगा। इस संग्रहालय में 20 मिनट में भगवान श्रीराम के आदर्श, उनके परिवार के बारे में और रामायण के बारे में जानकारी ले सकेंगे।रामायण संग्रहालय को दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर की तर्ज पर बनाने की योजना है।संग्रहालय को बनाने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का भी गठन किया गया है।वहां रामायण सर्किट की योजना को धरातल पर लाने के लिए भी प्रयास किये जा रहें हैं। इस सर्किट के जरिये नेपाल, अयोध्या और श्री लंका समेत भगवान रामचन्द्र से जुडे अन्य स्थलों को जोडने की योजना है। इसके अलावा अयोध्या में अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन होने की भी उम्मीद जताई जा है।उधर जवाब मे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अयोध्या में सरयू नदी के किनारे इंटरनेशनल रामलीला थीम पार्क बनाए जाने का ऐलान किया है। सीएम की अगुवाई में लखनऊ में हुई कैबिनेट मीटिंग में यह फैसला लिया गया। इसके मुताबिक राम लीला थीम पार्क इंटरनेशनल राम लीला सेंटर में बनाया जाएगा। इस के लिए लाल रेतीले पत्थर जैसे हाई क्वालिटी वाली सामर्गी इस्तेमाल की जायेगी। इस थीम पार्क में लाइब्रेरी, मूर्तियां और वाटर फॉल होंगे।वहीं यूपी सरकार ने राम की पैड़ी की सूरत हर की पैड़ी तर्ज पर बदलने का भी ऐलान किया है।ये भी सही है कि चाहे रामायण संग्रहालय बने या रामलीला पार्क इससे अयोध्या में पर्यटन के विकास में मदद मिलेगी।इस इलाके में रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी और इसके साथ ही भारत संस्कृति का देश-विदेश में प्रचार-प्रसार होगा।लेकिन अब जब चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में म्यूजियम और थीम पार्क बनाए जाने के ऐलान के पीछे राजनीतिक मंशा है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।बहुजन समाज पार्टी जैसे दूसरे दल ऐसे आरोप भी लगा रहें हैं।क्या ये सही नही है कि अयोध्या में भगवान तो त्रेता युग में रहते थे।लेकिन कलयुग में वहां लाखों इंसान रहते हैं जो तमाम बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं।अयोध्या की गलियां कूड़े से पटी पड़ी हैं।राम के नाम पर बनी राम की पैड़ी गंदगी से बजबजा रही है।लेकिन भगवान के नाम पर वोट मांगने वालों को इंसान की चिंता क्यों हो?
** शाहिद नकवी **

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran