Shahid Naqvi

Freelance Senior Journalist

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Shahid Naqvi


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कांग्रेस के बड़ों के खिलाफ आप का हल्‍ला बोल

Posted On: 19 Feb, 2014  
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कमज़ोर होते जनाधार से कांग्रेस मे घबराहट

Posted On: 7 Feb, 2014  
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संगम तीरे अव्‍यवस्‍था

Posted On: 21 Jan, 2014  
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बढ़ते शहरीकरण ने पक्षियों का नेवाला छीना

Posted On: 19 Jan, 2014  
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8 Comments

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: achyutamkeshvam achyutamkeshvam

के द्वारा:

श्री नकवी जी आपने चीनी वस्तुओं के उपभोग के खिलाफ आवाज उठायी है काश हम समझें हम चीन में निर्यात कम आयात अधिक कर रहे हैं आजकल दिवाली आने वाली है बाजार में चीनी सामान भरे हुए हैं पहले लोग अपने एरिया में छोटी -छोटी दुकाने लगाते थे बिक्री होती थी हर घर में खुशहाली आती थी अब तो चीन में लक्ष्मी जातीं हैं दिए पूजा के कलेंडर लक्ष्मी गणेश भी चीन से आरहे हैं शर्म की बात है हमारे बिजनेस में वहाँ से सामान खरीद कर भारत भेज रहे हैं हमारी सरकार कुछ नहीं करती कई उद्योग बंद हो गये हमारा बाजार ,हमें ही चीन आँख दिखाता है |आपका लेख ध्यान से पढ़ा काश हम जान पाते हम चीनी सामान खरीद कर अपने ही कुटीर उद्योग बंद कर रहे हैं

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री नकवी जी बहुत समय बाद आपका लेख पढने को मिला उत्तम ढंग से आपने तर्क सहित बिषय को रखा है सूर्य से पृथ्वी की दूरी "एक प्रश्नकर्ता ने उनसे सूर्य की पृथ्वी से दूरी पूछी तो जवाब में बताया कि एक अरबी घोड़ा पांच सौ सालों में जितनी दूरी तय करेगा वही सूर्य की पृथ्वी से दूरी है। उनके इस कथन के चौदह सौ सालों बाद वैज्ञानिकों ने जब यह दूरी नापी तो 149600000 किलोमीटर पाई गई। अरबी घोडे की औसत चाल 35 किमी प्रति घंटा बतायी जाती है और इससे यही दूरी निकलती है।"अपने समय के तेज रफ्तार से चलने वाले घोड़े की रफ्तार से सूर्य और पृथ्वी की दुरी समझाना किसी के भी समझ आ सकता है आप जिस विषय पर लिखते हैं सम्पूर्ण लिखते हैं

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री नकवी जी आपका लेख आज पढ़ने को मिला बहुत अच्छा लेख उत्तराखंड की राजनितिक परिस्थिति पर प्रकाश डालता लेख पहले रीता बहुगुणा के भाई विजय बहुगुणा को कांग्रेस ने मुख्य मंत्री पद के लिए भेजा गया था तब रावत जी को चेन नहीं था हर स्थिति में दल-बदल अवसरवाद या महत्वाकांक्षा या लोभ के कारण ही होता है।उत्तराखंड मे हरीश रावत द्वारा अपनी सरकार बचाने की कोशिश स्वाभाविक है। लेकिन इस स्थिति के लिए भाजपा का यह दावा भी हास्यास्पद है कि उसने असंतुष्टों को चारा नहीं डाला। सारी दुनिया देख रही है कि उत्तराखंड के असंतुष्ट् नौ विधायकों का विद्रोह दलबदल कानून की परिधि में है।"राजनितिक ज्ञान से भरपूर लेख ख़ैर आपके लेख सम्पूर्ण होते हैं आप मेहनत भी बहुत करते हैं |

के द्वारा: Shobha Shobha

shree नकवी जी सम्पूर्ण लेख अति उत्तम लेख ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि में होली का वर्णन अति सुंदर और शुरू ात में दिया निष्कर्ष हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां पर मनाये जाने वाले सभी त्योहार समाज में मानवीय गुणों को स्थापित करके लोगों में प्रेम, एकता एवं सद्भावना को बढ़ाते हैं।इसी लिये कहा जाता है कि भारत में त्योहारों एवं उत्सवों का सम्बन्ध किसी जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र से न होकर सम्भाव से है। यहां मनाये जाने वाले सभी त्योहारों के पीछे की भावना मानवीय गरिमा को आगे बढ़ना होता है।' बात जब त्योहारों एवं उत्सवों की आती है तो सभी धर्मों के लोग त्‍योहार आदर के साथ मिलजुल कर मनाते हैं।इस लिये देश के कई कोनों मे उत्सव धर्मों के उत्सव नहीं रह जाते बल्कि उत्सव अपने आप में एक ऐसे धर्म का रूप धर लेता है जिसमें सब सहभागी होते हैं।यही बात रंगों,उमंगों के त्यौहार होली पर भी लागू होती है।' यही हमारी सांस्कृतिक विरासत है |

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री शाहिद जी आपका यह लेख देखा सोचा इत्मिनान से पढूंगी यह इत्मिनान जब भर की ड्यूटी खत्म हो जाती है तब मिलता है लेख खो गया आप बड़ी मुश्किल से मिला है शाहिद जी मैने छह माह तक जे एनयू की लायब्रेरी में अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर बहुत अच्छा कलेक्शन है मेटीरियल इकठ्ठा किया था इतना अच्छा इंस्टीट्युट था बड़े अच्छे विषयों पर सेमिनार होते थे ज्यादातर कम्युनिस्ट दिमाग के लोग अधिक थे अब तो ऐसा झटका लगा नक्सल वाद के साथ अलगाव वाद को लेकर नारे हर यूनिवर्सिटी में पेंठ 125 करोड़ का देश है बदअमनी फैलाना बहुत आसान है सस्ती लोकप्रियता भी मिल जायेगी लेकिन ईजिप्त का हाल देखिये |कहाँ जायेंगे क्या हिन्द महासागर में जल समाधि लेंगे आपने बहुत जानकारी भरा लेख लिखा है उत्तम लेख |

के द्वारा: Shobha Shobha

जै श्री राम शहीद नाक्वीजी आप के ब्लॉग से हमें कोइ दुःख नहीं हुआ की क्योंकि ये नया नहीं सभी मिउस्लिम्स दादरी की बात करते परन्तु जब मुसलमानों ने कश्मीर पंडित भगा दिए तब क्या किसी सेक्युलर नेता या मुस्लिम ने निंदा की भारत में असहिष्णुता है ही नहीं कांग्रेस वाम दलों की साजिस थी अवार्ड लौटालनादेश के कुछ लोग विदेशी हाथो खेल रहे बीजेपी नेताओ के भाषणों पर आपति की जाती परन्तु जब दुसरे दल के ज़हर उगलते सब चुप रहते.संसद की कार्यवाही रोकने देश के विकास को रोक कर मोदीजी को बदनाम करना है.शाहरुक खान और आमिर ने दिखा दिया की वे पहले मुसलमान है बाद में भारतीय.कर्णाटक में मुसलमानों ने प्रशांत पुजारी को मार दिया कोइ नहीं बोला ये सब मोदीजी को बदनाम करने की साजिस है.ये सब बिहार चुनाव में बीजेपी को हराने की साजिस थी जो कामयाब हो गयी और एक अपराधी लुटेरे लालू को हीरो बना दिया,

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

श्री नकवी जी उत्तम लेख अब मेरी सुनिए मुस्लिम देशों में ताना शाही है शान्ति से मुल्क चलते थे ईरान उखाड़ा इराक सद्दाम को जैविक हथियारों के बहाने से हमला किया अफगानिस्तान में अलकायदा शुरू किया लीबिया आज तक सम्भला नहीं सीरिया बेरुत दुनिया में पैरिस माना जाता था पहले उन्हें प्रजातंत्र का पाठ पढाओ जब आन्दोलन शुरू हो जाते हैं सारा संतुलन बिगड़ जाता है वहाँ इस्लाम के नाम पर सत्ता को पकड़ने की कोशिश की जाती है अब तो ईरान भी शियाओं का रक्षक बन हिज्बुल्ला के माध्यम से अपनी खिचड़ी पकाता है हाँ एक वर्ग को बहुत फायदा होता है हथियार के सौदागरों को जब मुल्क बर्बाद हो जाता है उसके बाद कंस्ट्रक्शन कम्पनियों को फायदा होता है अब तो इस्लामिक स्टेट के कंसेप्ट ने पूरे विश्व को कहते में दाल दिया है | शांति से कोइ जीता ही नहीं है पिसता हैं आम नागरिक मैने यही समझा है में गलत भी हो सकती हूँ |

के द्वारा: Shobha Shobha

jlsingh जी आप सही कह रहें हैं ये बयान दिवंगत अशोक सिंघल जी ने दिया था ।अगर मीडिया कई बार पहले पहल की हड़बड़ी मे कुछ गड़बड़ कर जाता है ।लेकिन यहां माकपा सांसद की भी जिम्‍मेदारी थी कि वह पुराने बयान खंगालते । क्‍यों कि उनकी बात सारा देश सुन रहा था। वैसे माकपा सांसद श्री सलीम भी काबिल हैं मै उनकी कई पत्रकार वार्ता अटेंड कर चुका हूं। श्री राजनाथ सिंह बहुत सुलझे हुये और सहिष्‍णु नेता हैं । वह बहुत कम विचादित बयान देतें हैं ।पार्टी लाईन के बावजूद वह कई बार अलग से दिखतें हैं ।ये बात तो अब लगातार साबित हो रही है कि राजनीति सब अपने फायदे के लिये करती है ।सदन मे अब किसी को अड़ियल रूख नही रखना चाहिये ।

के द्वारा: Shahid Naqvi Shahid Naqvi

सोमवार को माकपा सांसद मोहम्मद सलीम के झूठे आरोप से राजनाथ सिंह सचमुच आहत हुए पर मोहम्मद सलीम ने माफी मांगने या बयान वापस लेने से भी इंकार कर दिया. जबकि आउटलुक पत्रिका ने माफी मांगकर यह साबित कर दिया की सलीम का आरोप गलत था. दरअसल ८०० साल बाद हिन्दू राज्य वाला बयान दिवंगत अशोक सिंघल ने दिया था और गलती से आउटलुक ने राजनाथ सिंह के नाम से छाप दिया. मीडिया भी बहुत हद तक जिम्मेदार है ग़लतफ़हमी पैदा करने में. शारुख खान भी सहिष्णुता वाले मुद्दे पर दुबारा बोलने से बचते नजर आये. तब भी उस पर लांछन लगा दिया किवे क्या इसलिए उस बयान से बचना चाहते हैं ताकि आमिर खान को होनेवाले नुक्सान से बच सकें ... जब प्रधान मंत्री ने आगे कदम बढ़ाया है तो विपक्ष को भी अपने तेवर ढीले करने चाहिए. आम सहमति के लिए.... यह मेरी अपनी निजी राय है.सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

नकवी साहब आप बहुत अच्छा लिखते हैं आपके लेख का एक -एक पैरा मैं बहुत ध्यान से पढ़ती हैं मिडिल ईस्ट मैं रहने का अवसर मिला सारा विश्व जानता है भारत में यह दोनों कौमे प्यार से रहती हैं यहां तक पाकिस्तान के पढ़े वर्ग से भी पारिवारिक संबंध बन जाते हैं |पाकिस्तान में बुद्धिजीवी प्रश्न करते हैं बटवारा क्यों हुआ इतना बड़ा बाजार बनता पूरा विश्व ललायित होता | भारत के उलेमा समाज ने बाहर आ कर विश्व को बताया भारत आतंक पसंद देश नहीं है शान्ति प्रिय लोग हैं यहां विविधता में एकता है | मुझसे जानकार मुस्लिम समाज अपने घर की परेशानी बताते हैं |जो अपने रिश्तेदारों से नहीं करते | मैं तो शादी ब्याह मैं बिचौलिये की भूमिका भी अदा करती हूँ अख़लाक़ की घटना का असर हम पर भी हुआ | ऐसे ही सिखों के के साथ जो हुआ वह आज भी दुःख देता है |

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री नकवी साहब मेने आपके लेख का एक - एक सेन्टेंस बोल बोल कर पढ़ा १ लोगों ने ठान कर वोट डाला,यही नही पिछले विधानसभा चुनाव से अधिक वोट डाला। २-अभी तक के मतदान में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी चौंकाने वाली है। उस नाते बिहार का लाख टके का सवाल है कि जब प्रदेश की राजनीति जातिवादी है तो युवा और महिला वोट भी क्या जातियों में बंध कर वोट डाल रहे है ३-विकास के पायदान पर सबसे नीचे खड़ा है ।रोजगार के साधनों की कमी के चलते यहां अपराध के रूप मे गरीबी का तांडव भी देखने को मिलता है सही है लोग कुछ नहीं मांग रहे थे केवल सडक बड़ा दुःख हुआ था अभी सडक भी एक मुद्दा है 4-ओबीसी और पप्पू यादव मुस्लिम और यादव वोटों पर जीतने की आशा लगा रहे हैं | फिर लिख रही हूँ आपके लेखों ने बिहार का आंकलन सिखा दिया |

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री नकवी जी शायद दाल पर पूरी जानकारीआपके लेख के अलावा कहीं नहीं मिलेगी | हमारे घर में पयः काया नहीं जाता अत : हम लोग दूसरे प्याज खाने वालो की चिंता करते हैं|' दाल' आज कल सब्जियों का सीजन है ख़ास कर पालक का वः महंगी नहीं है पालक से हेल्थ बनती है उसमे सब कुछ है और नहीं तो कई सब्जियां बाजार में आ जाएँगी सभी जमा खोरों के खिलाफ रोने के बजाए दाल का ही बहिष्कार कर दें कब तक दाल दबा कर रखेंगी चूहों से भी कब तक बचायेंगे फिर कीड़े भी पड़ जाते हैं सरकार कार्यवाही नहीं करती है जनता तो करती है| मैने जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा ऐसे देश में बिताया है जो लम्बे समय तक लड़ाई में जूझता रहा है मैने वहाँ किसी को बात - बात पर रोते नहीं देखा जो मिलता था खुदा का शुक्र करते थे | इस लिए नहीं वहाँ डिक्टेटर शिप थी इस लिए उन्हें अपने मुल्क से प्यार था|

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री नकवी जी आपके लेख से एक बात याद आ गई |ईश्वर की दया से मेरे बच्चे पढ़ने में अच्छे थे अब उनका कैरियर बन गया यह उस समय की बात है जब वह कम्पीटीशन दे रहे थे रात को देर तक पढ़ते थे सुबह - सुबह हमारे घर के सामने तीन स्कूल हैं वहां माइक पर बैड बजाते या अपने स्कूल का एड करने के लिए गुड मार्निग एवरी बड़ी बस उसके साथ ही हंगामा मच जाता हाय सोने भी नहीं देते लाउडस्पीकर कल्चर को रोका नहीं जा सकता |भारत बहुत विशाल देश है यहाँ प्रजातंत्र है सबसे बड़ी बात सशक्त मीडिया डिक्टेटर शिप में बहुत कुछ हो जाता है पता ही नहीं चलता |यहां हर तरह की विचार धारा के लोग अपनी खिचड़ी पकाते हैंउनकी राजनीति भी चमकाने का समय कभी - कभी आता है

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री नकवी साहब आपका पूरा लेख पढ़ा आपसे सवाल है वर्ष में एक बार पूरी दुनिया से लोग धर्मिक यात्रा पर जाते हैं सबकी भाषा अलग है अपने लोगों के अलावा दूसरों को पहचानते नहीं हैं जो निर्देश दिए जाते हैं उसको फॉलो करते हैं या नही यह भी पता नहीं एक ही समय में सब अपनी धार्मिक क्रिया पूरी करना चाहते हैं हमारे यहां कुम्भ के मौके पर हादसे हो जाते हैं जबकि सारा प्रशासन इस चिंता में रहता है कहीं कोई हादसा न हो जाए हाँ क्रेन गिरने की घटना लापरवाही की है |यह तो सऊदी अरेबिया है राज तंत्र है बेईमानी नहीं है और जगह यदि ऐसी भीड़ आ जाए सोचिये क्या होता है जो भी हज से आता है बहुत अविभूत होता है वहां के प्रबंधन की तारीफ़ करता है

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: DEEPTI SAXENA DEEPTI SAXENA

के द्वारा: Shahid Naqvi Shahid Naqvi

योगी सारस्‍वत जी हौसला बढ़ाने के लिए आपका आभार ।इस समय मै एक आम मतदाता की हैसियत से बात कर रहाहूं ,देश से अल्‍पसंख्‍यक और बहुसंख्‍यक वाद अब समाप्‍त होना चाहिए ।65 साल मे भी हम उसी मे उलझे हैं ।लेकिन इसके लिए सिर्फ कांग्रेस को दोषी ठहराना उचित नही है।भाजपा भी वोट लेने के लिए एक वर्ग का विरोध करती है।जबकि असलियत है कि सरकारें सिर्फ घोषणाएं भर करती हैं ।वह ज्‍़यासदातर मीडिया मे छाने के बाद धरातल तक नही पहुंचपाती हैं।आप यकीन जानिए अगर भाजपा विरोध करना बंद कर दे तो ऐसी घोषणाएं बंद हो जायेगीं और असलियत मे काम होने लगेगा।मेरी नज़र मे बात सारे ग़रीबों की होनी चाहिए ।काश के ऐसा हो जाए तो सारी समस्‍याऐं खुद दूर हो जायेगीं।लेकिन देश के लिए भाजपा को भी अपना दिल बड़ा करना चाहिए ।ये वोट बैंक की राजनीति अपने आप बंद हो जायेगी ।धन्‍यवाद

के द्वारा: Shahid Naqvi Shahid Naqvi

के द्वारा: Shahid Naqvi Shahid Naqvi

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के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: Shahid Naqvi Shahid Naqvi

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